व्यर्थ ना करो तुम इसे, खेल नहीं ये तो जिंदगानी है,
जो मानव शरीर मिला है सबको उसका सबसे बड़ा स्रोत पानी है।
तड़प रहे पशू पंछी जरा सा पानी पीने को,
सम्भल भी जाओ अब मत करो छलनी धरती के सीने को।
डाल के गन्दगियाँ हम नदियों में क्यों सोचें कि सोसाइटी साफ है?
मानव ही बन रहा है जल प्रदूषण का जिम्मेदार और ये सबसे बड़ा पाप है
सूखने लगी है जल नदी ,नालो तालाब और नहरो में,
कुछ दिन पहले ही सुना कि भूमिगत जल ही नहीं है शहरों में।
कल कल, छल छल करती थी कभी जो गंगा जी की लहरें थी,
भूकम्प बाढ़ नहीं थे वो ,वो प्रकृति की कहरें थी।
निवेदन है सबसे सबको जागरूक करें भाषण और नौटंकी से,
जल को हर तरह से संचित करें और बहने ना दें टंकी से।
ग्रहण करके जल को सभी अपनी प्यास बुझाते हैं,
जरा सी पानी की कमी से चारो तरफ सूखे पड़ जाते हैं।
जीवन का मूलमंत्र जल है आओ मिलके इस मंत्र को याद करें,
शपथ ले,कसम खाएं, वादा करें आज और अभी से पानी ना बर्बाद करें।।
अनिल कुमार गुप्ता
कभी हमने भी पढा था कि धरा पर जल की मात्रा तीन चौथाई है,
क्या जल बर्बाद करने की सबने बीड़ा उठाई है?तड़प रहे पशू पंछी जरा सा पानी पीने को,
सम्भल भी जाओ अब मत करो छलनी धरती के सीने को।
डाल के गन्दगियाँ हम नदियों में क्यों सोचें कि सोसाइटी साफ है?
मानव ही बन रहा है जल प्रदूषण का जिम्मेदार और ये सबसे बड़ा पाप है
सूखने लगी है जल नदी ,नालो तालाब और नहरो में,
कुछ दिन पहले ही सुना कि भूमिगत जल ही नहीं है शहरों में।
कल कल, छल छल करती थी कभी जो गंगा जी की लहरें थी,
भूकम्प बाढ़ नहीं थे वो ,वो प्रकृति की कहरें थी।
निवेदन है सबसे सबको जागरूक करें भाषण और नौटंकी से,
जल को हर तरह से संचित करें और बहने ना दें टंकी से।
ग्रहण करके जल को सभी अपनी प्यास बुझाते हैं,
जरा सी पानी की कमी से चारो तरफ सूखे पड़ जाते हैं।
जीवन का मूलमंत्र जल है आओ मिलके इस मंत्र को याद करें,
शपथ ले,कसम खाएं, वादा करें आज और अभी से पानी ना बर्बाद करें।।
अनिल कुमार गुप्ता