बिन उसके अधूरी हमारी पहचान है
वो क्या है शब्दों में कैसे करूं बयां
वो आन है शान है सारा जहान है
हंसी और खुशी है वो प्यार और दुलार है
घर एक बगिया वो बगिया में बहार है
मां बहन बेटी और पत्नी का रूप है
जहां ये रूप सारे वो सच्चा परिवार है
घर वह बेमतलब जहां नारी नहीं बसती
नारी जिस घर में वो घर ही उजियार है
वो लक्ष्मी वो काली वो दुर्गा बन जाती है
कभी वो इंदिरा बनकर देश को चलाती है
वो फूलन वो लक्ष्मीबाई वो है मदर टेरेसा
वो सबरी प्रभु राम को जूठन खिलाती है
वो सीता भी है तू राम तो बन
वो राधा भी है तू श्याम तो बन
फेंक गंवारपन को कहीं दूर