MEHFIL MEIN KISMAT KISMAT KI BAAT HO RAHI THI
AB UNHEIN KAUN BATAAYE KI
MERA AASHIYAANAA TAB JALAA THA JAB BARSAAT HO RAHI THI
महफ़िल में किस्मत किस्मत की बात हो रही थी,अब उन्हें कौन बताए कि, मेरा आशियाना तब जला था जब बरसात हो रही थी।
कुछ रहा ना तेरे बाद पिया।।
पता चलत अब सुख दुख नाहीं
सुमिरत रहत तोहें मन माहीं
हम राही तुम पीपल छाहीं
रह गई है तुम्हरी याद पिया।
कुछ रहा ना तेरे बाद पिया।।
बिसरत नाहीं वो बिते दिन
गुजरत ना थे जो तुम्हरे बिन
बिलख बिलख के रोये बिरहिन
रैना लागे जल्लाद पिया।
कुछ रहा ना तेरे बाद पिया।।