रविवार, 7 मार्च 2021

Happy international women's day ।।। विश्व महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।शायरी

वो शक्ति हमारी वो ही सम्मान है,
बिन उसके अधूरी हमारी पहचान है
वो क्या है शब्दों में कैसे करूं बयां 
वो आन है शान है सारा जहान है
हंसी और खुशी है वो प्यार और दुलार है 
घर एक बगिया वो बगिया में बहार है
 मां बहन बेटी और पत्नी का रूप है
 जहां ये रूप सारे वो सच्चा परिवार है
 घर वह बेमतलब जहां नारी नहीं बसती
 नारी जिस घर में वो घर ही उजियार है
 वो लक्ष्मी वो काली वो दुर्गा बन जाती है 
कभी वो इंदिरा बनकर देश को चलाती है 
वो फूलन वो लक्ष्मीबाई वो है मदर टेरेसा
 वो सबरी प्रभु राम को जूठन खिलाती है 
वो सीता भी है तू राम तो बन 
वो राधा भी है तू श्याम तो बन
 फेंक गंवारपन को कहीं दूर
 जहिलियत को तज कर आम तो बन

मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

KISMAT PAR SHAYRI-किस्मत शायरी(best shayri)


MEHFIL MEIN KISMAT KISMAT KI BAAT HO RAHI THI
AB UNHEIN KAUN BATAAYE KI
MERA AASHIYAANAA TAB JALAA THA JAB BARSAAT HO RAHI THI





 महफ़िल में किस्मत किस्मत की बात हो रही थी,

अब उन्हें कौन बताए कि, मेरा आशियाना तब जला था जब बरसात हो रही थी।

बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

PAIN OF A WIFE OF AN INDIAN ARMY!! भारतीय सेना

कुछ  रहा ना तेरे बाद पिया।।

पता चलत अब सुख दुख नाहीं

सुमिरत रहत तोहें मन माहीं

हम राही तुम पीपल छाहीं


रह गई है तुम्हरी याद पिया।

कुछ रहा ना तेरे बाद पिया।।

बिसरत नाहीं वो बिते दिन

गुजरत ना थे जो तुम्हरे बिन

बिलख बिलख के रोये बिरहिन

रैना लागे जल्लाद पिया।

कुछ रहा ना तेरे बाद पिया।।

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

रविवार, 31 जनवरी 2021

ZANNAT HAI YEH ZAMEEN

                                        


हां! मुझे इन हवाओं से प्यार है।।



यहीं खिलते कमल हैं,

यहीं बनती गज़ल हैं,

ये धरा बड़ी ख़ूबसूरत,
सहज और सजल है,
बगियन में भी एक नई सी बहार है।
हां!मुझे इन हवाओं से प्यार है।।



खेत लहलहाते हैं,
पुष्प मुस्कुराते हैं,
नदियां भी कल कल सी,
मधुर स्वर सुनाती हैं,
बहने को संग इनके ह्रदय बेकरार है।
हां!मुझे इन हवाओं से प्यार है।।


 

शहर हैं व गांव भी हैं,
नीर का जमाव भी है,
आज मेघ गरजन में,
एक अलग सा ताव भी है,
वृक्ष और पुष्प इस धरा की श्रृंगार हैं।
हां!मुझे इन हवाओं से प्यार है।।



ग्रीष्म है बसंत है,
सर्दी भी अनंत है,
नाचते मयूर जैसे,
वन ही रंगमंच है,
प्रकृति की हरकत में संगीत की भरमार है।
हां!मुझे इन हवाओं से प्यार है।

हां!मुझे इन हवाओं से प्यार है।।

                                                                                               – अनिल कुमार गुप्ता



सोमवार, 2 सितंबर 2019

जल संकट

                      

 व्यर्थ ना करो तुम इसे, खेल नहीं ये तो जिंदगानी है,
 जो मानव शरीर मिला है सबको उसका सबसे बड़ा स्रोत पानी है
 कभी हमने भी पढा था कि धरा पर जल की मात्रा तीन चौथाई है,
 क्या जल बर्बाद करने की सबने बीड़ा उठाई है?
 तड़प रहे पशू पंछी जरा सा पानी पीने को,
 सम्भल भी जाओ अब मत करो छलनी धरती के सीने को।
 डाल के गन्दगियाँ हम नदियों में क्यों सोचें कि सोसाइटी साफ है?
 मानव ही बन रहा है जल प्रदूषण का जिम्मेदार और ये सबसे बड़ा पाप है
 सूखने लगी है जल नदी ,नालो तालाब और नहरो में, 
कुछ दिन पहले ही सुना कि भूमिगत जल ही नहीं है शहरों में।
 कल कल, छल छल करती थी कभी जो गंगा जी की लहरें थी, 
भूकम्प बाढ़ नहीं थे वो ,वो प्रकृति की कहरें थी।
 निवेदन है सबसे सबको जागरूक करें भाषण और नौटंकी से,
 जल को हर तरह से संचित करें और बहने ना दें टंकी से। 
ग्रहण करके जल को सभी अपनी प्यास बुझाते हैं, 
जरा सी पानी की कमी से चारो तरफ सूखे पड़ जाते हैं। 
जीवन का मूलमंत्र जल है आओ मिलके इस मंत्र को याद करें,
 शपथ ले,कसम खाएं, वादा करें आज और अभी से पानी ना बर्बाद करें।।
                                                                                                  अनिल कुमार गुप्ता